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कहानी· 30 जून 2020· Amsterdam

दुनिया को धीमा करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल

दुनिया को धीमा करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल

एम्स्टर्डम के पश्चिमी बंदरगाह इलाक़े में स्थित अपने स्टूडियो में हम एक नए ही तरह का व्यवसाय खड़ा कर रहे हैं: एक Slowtech व्यवसाय। यहाँ हम कुछ बेहतरीन दिमाग़ों के साथ मिलकर तकनीक के इस्तेमाल के नए तरीक़े खोजते, डिज़ाइन करते और विकसित करते हैं — और इसका मक़सद बस एक है: दुनिया को धीमा करना।

पिछले कुछ वर्षों में कई डिज़ाइनरों और टेक्नोलॉजिस्टों ने ज़करबर्ग के इस सिद्धांत की सराहना की है: 'तेज़ी से आगे बढ़ो और चीज़ों को तोड़ दो।' आज हम जानते हैं कि जब किसी चीज़ का इकलौता मक़सद लोगों का ध्यान खींचना भर रह जाए, तो क्या होता है। इससे एक ऐसी दुनिया बनती है जो पहले से ज़्यादा बँटी हुई और कम जुड़ी हुई होती है। हमारा मानना है कि जिस तकनीक का इस्तेमाल बड़ी टेक कंपनियाँ हमें बाँटने के लिए करती हैं, उसी तकनीक का इस्तेमाल हमें फिर से जोड़ने के लिए भी किया जा सकता है।

2019 में हमने Chairwave के ज़रिए दिखाया कि डिज़ाइन और तकनीक का इस्तेमाल करके भौतिक दुनिया में लोगों की मुलाक़ातें कैसे बढ़ाई जा सकती हैं। Chairwave कुर्सियों की एक पारस्परिक कतार है, जिसमें कोई भी सीट तभी खुलती है जब वह किसी और के बगल में हो। यह चंचल संवाद, प्रकाश के डिज़ाइन के साथ मिलकर, लोगों के बीच बातचीत शुरू करने का एक बहाना बन जाता है (इस प्रभाव को 'ट्राएंगुलेशन' भी कहा जाता है)। हम इसे ही Slowtech कहते हैं: यानी हमारे आसपास की दुनिया को धीमा करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल।

17वीं सदी के एम्स्टर्डम में स्पिनोज़ा ने कहा था, 'समझना ही स्वतंत्र होना है।' लेकिन ऐसा लगता है कि नई तकनीकें हमसे सच में समझने का वह समय ही छीनती जा रही हैं, और इसीलिए हमें चीज़ों को धीमा करने की ज़रूरत है। तभी हम सचमुच स्वतंत्र हो सकते हैं।